प्यारे दोस्तों........... बात ज़यादा पुरानी नहीं है .
............ अभी महज़ चार ही दिन बीतें है बात है 25 दिसम्बर 2010 की वक़्त रहा होगा कोई रात का 9:45 क्रिसमस होने की वजह से मेरे बॉस(श्री अनुराग त्रिपाठी जी यू . पी हेड न्यूज़ एक्स टी वी चैनल) ने मुझको जल्दी छोड़ दिया था और मै भी और लोगों की ही तरह, क्रिसमस की शाम का मज़ा ले कर घर को लौट रहा था. जल्दी घर आने का ये सबब बिलकुल नहीं था की पिता जी की डांट पड़ेगी. या मेरी माँ मेरी फिक्र करेंगी, पर सिर्फ इसलिये की 25 दिसम्बर की उस शाम को ठण्ड काफी थी. और मैने भी नौजवानी के जोश मे ज्यादा कुछ पहना नहीं था . जैसे ही मै अपने शहर लखनऊ के मशहूर हजरतगंज चौराहे के करीब आया एक दृश्य को देखकर मै अन्दर से हिल गया, मेरे रोंगटे खड़े हो गए .जहाँ एक ओर पूरा शहर जशन मे डूबा था, हर आते जाते को मेरी क्रिसमस - मेरी क्रिसमस कर के बधाई दी जा रही थी वही इस जशन से बहुत दूर करीब एक 80 साल का बूडा इंसान मारे ठण्ड के करवटें बदल रहा था कभी वो दोनों पैरों को सीने से सटाकर गर्मी का एहसास लेता तो कभी अपने हाथों से अपने सर को दबा लेता अच्छा क्यूँकी शहर की भीड़ से थोडा दूर वोह एक कोने मे पड़ा सर्दी से जंग लड़ रहा था शीत लहर से दो चार हो रहा था उसके दांतों की किट- किट उस भीड़ भरे सन्नाटे को चीर सी रही थी . जब उससे रहा नहीं गया तो वोह वहां से उठा और न जाने कहाँ चला गया ............ चूँकि मैने अपने दोस्त को गाड़ी लेकर वही बुलाया था मेरा दोस्त भी अपनी गाड़ी लेकर वहां आ गया . मैने एक बार फिर पीछे मुड के देखा वोह आदमी भीड़ मे कही गुम हो गया था . मै अपने दोस्त की गाड़ी पर बैठा और घर की ओर चल दिया जैसा की मैने आप लोगों को पहले ही बता दिया है की उस दिन ठण्ड काफी थी मै गाड़ी मै पीछे बैठा काँप रहा था और अपने दोस्त इमरान से जो आगे गाड़ी चला रहा था बोला भाई गाड़ी ज़रा धीरे चलाओ ठण्ड लग रही है वोह जोर से हंसा और गाड़ी को धीमा कर लिया तभी अचानक एक ख्याल मेरे दिमाग मै आया " एक नौजवान होने के नाते जब मुझको इतनी ठण्ड लग रही है तो उस बेचारे का क्या हाल हो रहा होगा मुझको तो घर जाकर माँ के हाथ की बनी हुई गरमा गरम चाय मिलेगी ओढने के लिहाज़ से कम्बल मिलेगा ........आखिर इस बेचारे का क्या होगा . कही ऐसा ना हो की सुबह अखबार में ये आये की "ठण्ड ने ले ली एक और जान"क्या वोह ज़िन्दगी और मौत की इस जंग मै मौत को शिकस्त दे देगा? क्या वोह इस सर्दी के बाद आई धूप का मज़ा ले लेगा?ये मै नहीं कह सकता ये तो आने वाला वक़्त बताएगा लेकिन हाँ मै उस परम पिता परमात्मा से यही प्रार्थना करूँगा की हे इश्वर उस आदमी को लम्बी उम्र दे ........... और हाँ दोस्तों अभी मै काफी हद तक इत्मेनान मै हूँ क्यूँकी अभी तक मैने अखबार मै ये नहीं पढ़ा की ठण्ड ने ले ली एक आदमी की जान या कुछ इस तरह का हुआ हो ............ दोस्तों मैने लिख दिया और अपने पढ़ लिया मेरा मकसद यहाँ लिखना और आपको पढाना बिलकुल नहीं था मेरा मकसद ये था की हम लोग एक ऐसे विषय पर अपनी संवेदना ज़ाहिर करें जिसे हमारा समाज लगातार नकार रहा है क्यों हम इत्ते खुदगर्ज़ हो गए है की मानवता को लगातार भूलते जा रहे है.दोस्तों सोंचो......... सोंचते जाओ आज ये मेरे साथ हुआ है कल आप भी इस्से दो चार हो सकतें है अगर हम दिल से साफ़ होंगे तो खुद बा खुद हमारे दिल से निकलेगा मेरी क्रिसमस ...........तो दोस्तों अगर हम इन लोगों के लिए कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम इनको अपने से दूर रखने का हक भी हमको बिलकुल नहीं है .आशा करता हूँ की शायद इस को पडने के बाद हमारे अन्दर सो चुकी संवेदना शायद एक बार जाग जाय ...........इसी आशा के साथ आपसी अलविदा लेता हूँ की आप इस विषेय पर चिंतन करेंगे .
अच्छा दोस्तों अलविदा
