प्यारे दोस्तों सबसे पहले तो आप लोगों को इस नए साल कि तहे दिल से मुबारकबाद ईशवर करे ये नया साल बहुत सारी खुशियाँ .लेकर आये .कभी भी अपने जीवन मे आप किसी परेशानी से ना ग्रस्त हो
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................ मित्रो आज मै काफी दिन के बाद लखनऊ प्राणी उद्यान गया .शायद आपको लखनऊ तो समझ आ गया हो लेकिन ये प्राणी उद्यान ना समझ आया हो चलिए मै आपकी मुश्किल को आसान कर देता हूँ वोह था लखनऊ चिड़ियाघर . ................ क्या नज़ारा था वहां, कौन जानवर कौन इंसान फर्क करना काफी मुश्किल लगा मुझको .किसी ने सच ही कहा है कि....." चिड़ियाघर एक ऐसी जगह है जहाँ पशु मानव के व्यव्हार का अध्ययन करते है ", जैसे ही मै गेट से अन्दर घुसा बड़ी तकलीफ हुई मुझको वहां का नज़ारा देखकर एक तो हड्डी गला देने वाली सर्दी उपर से ख़राब मौसम, जानवर इंसान से ज़यादा हैरान परेशान लगा मुझको, वहां जमा हुई भीड़ देखकर.. शुरुआत हुई सांप घर से ,सांप होता है अँधा बहरा सो शोर शराबे का कोई खासा असर नहीं दिखा मुझे उसपे फिर हम आगे बढे, आगे था बंदरों का बाड़ा ,मैने मानवशास्त्र मै पूरे ३ साल यही पढ़ा कि बन्दर हमारा पूर्वज है हमारे पिता तुल्य है हमारा बड़ा भाई है लेकिन यहाँ इंसान जो हरकत कर रहा था उसे देखकर मन ही मन वोह(बन्दर ) ये सोंच रहा होगा कि इन इंसानों से तो हम बन्दर ही अच्छे, अच्छा हुआ मै विकसित होकर इंसान नहीं बना वरना मै भी ऐसा ही होता ,कोई बाडे मे पत्थर मार रहा था कोई अपने चेहरे के हाव भाव उनसे भी बुरे तरीके से पेश कर रहा था .... बन्दर भी शायद ये सब देख कर इन सब का आदी हो गया था उसने अपनी कोई ख़ास प्रतिक्रियाः नहीं दी इंसान बेचारा मुह कि खा कर रह गयाफिर क्या था मै भी उन लोगों के साथ साथ आगे आया कभी कोई हिरन से मजाक करता दिखा तो कही कोई बेजुबान पंछियों से दो चार होता दिखा ........ कहा जाता है इन्सान जानवर से डरता है , भयभीत होता है मगर यहाँ तो कुछ उल्टा ही दिखा ,इंसान का खौफ ऐसा कि जानवर कोने मे दुबका दिखाई दिया . कितने शर्म कि बात है हमारा मनोरंजन किसी को दुःख दे गया सबसे बड़ी बात ये कि जगह जगह लिखा था " कृपया जानवरों को कुछ भी खाने को ना दे और उन्हें व्यर्थ परेशान ना करें पर ये बात वहां चिपके बोर्ड तक ही सिमित रह गई ............. लिखा था यहाँ गन्दगी ना करे लेकिन हे मानव तुझे जितना समझाया तेरी समाज मै कुछ ना आया ...... दोस्तों जानवर तो आखिर जानवर है हम तो इंसान है मगर क्या कोई फर्क है हममे और उसमे .कितने दुःख कि बात है हम सब कुछ बनकर भी आखिर इंसान ना बन सके...... अंत मै मै अपनी बात ख़तम करते हुए बस यही निवेदन आपसे करूँगा कि अपना मनोरंजन को अपने तक ही सिमित रखे . कम से कम कुछ ऐसा करें कि हमे अपने को इंसान कहने मे गर्व हो ........... यही काफी है कि , इंसान हो इंसान बनो
